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हाथ जोड़ कर कर रहे निवेदन

हम भी संतान आपकी हैं यहाँ

पर आप निहार सको हमें यहाँ।।

माना आबादी हैं ज्यादा देश की

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हमें भिजवाओ आप वहाँ पर

है समाधान हमारे पास यहाँ

दोनो पक्षो की हैं भलाई

भलाई देश की छुपी हैं यहाँ।।

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जंग छिड़ी हैं वहाँ पर

हाताश किसान हो रहे वहां

सरकार हो चुकी हैं लाचार हैं

ना आगे बढे ना पीछे हटे वहाँ।।

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देवी वक़्त सब सीखा देता हैं

जैसा समय,वैसी बुद्धि

संकल्पित इंसान की

तो भगवान भी

खुद मदद करने आते है।।

आएगे देवी जरूर आएगे

हमारे भगवान भी

जरूर आएगे

न्याय के प्रति संकल्पित कलम

अपने शब्दों से भगवान को उतार लाएंगे।।

फागन से कोशिश कर रहे है

माफी माँग कर अत्तित भूल जाए

पर आपने माफ नही किया

सत्य बहुत कड़वा होता हैं देवी

सब्र रख,खबर रख

पर द्रष्टि हमपर

रखो यहाँ।।

अब बन्द शब्दो का गया जमाना

स्वर,व्यंजन,शब्दो सँग उतरे ध्वनि यहाँ

39

आजीवन बनाए रखना दृष्टि
जागे भाग्य हमारे धरा यहाँ
बहुत आभारी रहेगे आपके
चाहते आजीवन दृष्टि
आप रखो यहाँ।।
  धन्यवाद।।

37

दुनिया के पहले इंसान बने हम
फिर चमत्कार किया अध्बुध यहाँ
हमारी माँ
तेरह दिवस तक हमारे साथ रही
शब्दो बदौलत हमारे साथ रही यहाँ।।

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यही अंतिम निवेदन हमारा
यही अरदास थी हमारी यहां
यही अंतिम थी विदाई आपकी
चाहो तो जाओ,चाहो तो रुको यहां।।

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होगी जो देखी जाएगी माता हमारी
हम गलत कभी ना लिखे यहाँ
दो सजा दो या दो अनुमति
सब आप पर निर्भर
हैं यहाँ।।

33

इंतजार कर रहे हैं घर अपने
01/04/2021
तारीख़ तक है यहाँ
दर्शन दो या प्रेत योनि दो
आज्ञा सर आंखों रखेगे यहाँ।।

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जन्म आपने दिया था माँता हमको
दोनो बाते लिखित कह दी यहाँ
जैसा चाहो हम जिएंगे वैसा
यही अंतिम विदाई थी आपकी यहाँ।।

32

दर्शन पाकर ही जाएगे दिल्ली
फिर समय खोएंगे ना कभी यहाँ
ना दोगे दर्शन तो ना जाएगे दिल्ली
मर कर भटकेंगे प्रेत योनि में सदा यहाँ।।

31

इंतज़ार करेगे हम आपका
हैं माता विनती सुनलो यहाँ
हो सेवा से सन्तुष्ट अगर तो
देना दर्शन हमको आप यहाँ।।

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हैं तैयार हैं हम रहे तत्त्पर सदैव
हर सजा को हैं तैयार सदा
जैसा कर्म वैसा फल मिले
मिले आज नही तो कल धरा यहाँ।।

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भूल चुक हमसे बहुत हुई
हो नाराज तो सजा देना यहाँ
इसी जन्म का इसी जन्म में भोगे
ना चाहते कोई उधार हम पर चढ़े यहाँ।।

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कर्ज उतारना चाहते माँ का
चढ़ा विदेशी कर्ज हैं बहुत यहाँ
अहसास तलक नही किसी को
हमारे दिमाग मे गणित हैं फिट यहाँ।।

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भारत माता से भी करेगे निवेदन
माँ पर अधिकार हमारा हैं यहाँ
पुत्र उनके पुत्र है हम आपके
चाहते राष्ट्रीय पुत्र हम बने यहाँ।।

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नेक कर्म जो कभी, किया अगर हो
या कभी दिल से सेवा लगी हो यहाँ
तो देना आशीष,हम दिल्ली पहुचे
वही रहे, कमाए,खाए, लिखे वहाँ।।

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संकल्प सिद्ध हैं करना हमे
जीना,समर्पित जीवन हैं यहाँ
समर्पण में अर्पण करे जीवन
दो माँ दर्शन दो हमे
हम जाना चाहते हैं वहाँ।।

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कर्म भूमि दिल्ली बनाए अपनी
हमे दिल्ली में मिले स्थान वहाँ
वही लिखे,वही कमाए खाए हम
वही से,दिल से दिल जोड़े यहाँ।।

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