20

आज सबका जीवन,बंधा बंदिशो
हम भी बंधना चाहते हैं यहाँ
बंदिशें हो,राहै सत्य की
हम सत राह पर सदा चले यहाँ।।

19+

दो दर्शन दो आप माता हमे
लिखित निवेदन करे यहां
साक्षात दो या स्वप्न्न में दो
चाहते दर्शन,आज्ञा दो यहाँ।।

19

कृपा करो,हैं माता हमारी
आज्ञा हमको दो यहाँ
स्वेच्छिक निर्णय
सफल करे
करे समर्पण खुद का हम वहाँ।।

17

दो अनुमति दो माता आप हमें
हम दिल्ली जाना चाहते वहाँ
जंग छिड़ी है आज देश मे
अपने विचार रखना चाहते वहाँ।।

16

है माता अब दो अनुमति हमें
कर्म कांड पूरे हुए यहाँ
दाह संस्कार से विसर्जन तक
हर क्रिया सम्पूर्ण हुई अब यहां।।

14

दिल से करते थे सेवा आपकी
कोई माने या ना माने यहाँ
देखने वाले भी देख रहे
माना तस्वीरों से देखे यहाँ।।

13

पता आपको पता है हमको
दुनिया से क्या कहे यहाँ
हर एक पल जीवन हमारा
गुलाम आपका था धरा यहाँ।।

12

आज बाते बना रहे लोग है
हम इंसान लालची हैं यहाँ
घर हमारा हक हमारा
किसी ओर का
दखल क्यो हो यहाँ।।

11

जैसे कर्म वैसे ही फल
भोगे इंसान धरा यहाँ
हमारे कर्मो की सजा मिले
अगर गलत कभी जो किया यहाँ।।

10

भला करे वो बने बुरा
बुरे को मिलता भला यहाँ
युग बदला हैं सोच बदली हैं
बदला मानव,मानव से है यहाँ।।

09

जितना कमाया सब दिया आपको
हमने कभी ना जोड़ा धन यहां
फिर भी बदनाम हम हुए आज है
जब कोई सहारा प्राणी ना धरा यहाँ।।

08

विश्वाश रखा हमने खुद पर
ओर कमा लगे धरा यहाँ
हाथो बरकत रहे उसी के,जो
परिवार पर समर्पित रहे सदा।।

07

ताउम्र कमा कर हमने दिया आपको
कभी खुद का कभी ना सोचा यहाँ
पता आपको सत माता हमारी
हमे कोई लोभ ना कभी यहाँ।।

06

किसी से हम डरे नही माँ
सत्य कह/लिख रहे यहाँ
सदा कोई व्रक्ष फल ना दे कभी
आता पतझड़ का भी मौसम हैं यहां।।

05

हर कोशिश व्यर्थ हो चुकी हमारी
हम भी क्या कर सके यहाँ
समय बदला हम बदले
सब कर्मो का है खेल यहाँ।।

04

विपरीत दशा चल रही हमारी
लड़ वक़्त से रहे यहाँ
कोशिश करते टूटे हम
टूट अंदर से गए थे यहां।।

विपरीत दशा चल रही हमारी
लड़ वक़्त से रहे यहाँ
कोशिश करते टूटे हम
टूट अंदर से गए थे यहां।।

03

है दोषी है हम धरा आज है
आपके दोषी रहेगे हम यहाँ
अंत समय दुख दिए आपको
यह दुख आजीवन रहेगा यहाँ।।

02

हैं माता हमारी प्राणों से प्यारी
हम बहुत शर्मिंदा है यहाँ
अंत समय दुख भोगे आपने
अहसास आजीवन रहेगा यहाँ।।

माँ, मेरी माँ। बारवा दिन

आज दिन पूर्ण हो चुके हैं माता

जो साथ धरा पर था यहाँ

रस्मो पूर्ति कर चुके हैं हम

निभाया अपना फर्ज यहाँ ।।

माँ, मेरी माँ ग्यारवा दिन

ग्यारवा दिन पूर्ण हो चुका माता

आज रस्म बारवे की निभाए यहाँ

कर्म कांड का दिन अंतिम है

फिर स्वीकारनी वक़्त की

हर चुनोती यहाँ।।

दृष्टि रखना आप अपनी माता

ना भटकने हमको देना यहाँ

हैं अकेले,भटक सकते है

सम्भाल हमको लेना यहाँ।।

21

यही अनुरोध यही विनती हमारी,
यही अरदास आपसे कर रहे यहां,
इज्जत रखना आप शब्दो की,
इज्जत कलम की आप रखना यहाँ।।

20

अरदास हमारी पूरी करो देव,
हमारे विश्वाश की रखो लाज यहाँ,
समय की कसौटी नज़दीक आई,
हम साथ सत्य का दे सदा।।

19

हैं देव हमारे कृपा करो आप,
बिराजो उनके साथ यहाँ,
सरस्वती,लक्ष्मी राह तके आपकी,
मध्यस्त बिराजो आप धरा वहाँ।।

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