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माँ, मेरी माँ। बारवा दिन

आज दिन पूर्ण हो चुके हैं माता जो साथ धरा पर था यहाँ रस्मो पूर्ति कर चुके हैं हम निभाया अपना फर्ज यहाँ ।।

माँ, मेरी माँ,, छठवा दिन

गए थे मन्दिर हम माता हमारी माँगी हमने भीख वहाँ भीख में माँगी भक्ति हमने सामने शक्ति थी खड़ी वहाँ।। देख रही थी सामने हमको हम उनको देखे वहाँ नज़रो आंसू बह रहे थे हमारे,पर नज़र,नज़रो से मिल रही थी वहाँ।। उन्हें पता है सत भावना हमारी पता निडरता का है यहाँ साफ ह्रदय रखापढ़ना जारी रखें “माँ, मेरी माँ,, छठवा दिन”

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