कहानी एकलव्य की

आज देश मे जंग छिड़ी हैं

देश

दो भागों बटता दिख रहा यहाँ

जंग छिड़ी है विचारों की

दोनो कहे

बड़े है यहाँ।।

लड़ने लगे हैं दोनो,ऐसे

जैसे मर्यादा ही

लांघ रहे हैं यहाँ।।

दोनो छोटे नही मगर

दोनो बड़े भी नही है यहाँ

वर्चस्व की जंग नही मगर

वर्चस्व दिख रहा यहाँ।।

कोई नही चाहता छोटा बनना

जबकी छोटा ही

बड़ा होता हैं यहाँ

हम भी देखे बैठे बैठे

पढ़े नित्य

अखबारों में यहाँ।।

कलम के धनी हमे बनाया

देवी उपहार हमको दी यहाँ

बोली हमको,आदेश दिया

आप लिखो धरा यहाँ।।

शब्दो ने हमे चुनोती दी थी

इज्जत कलम की रखो यहाँ

दुख देवी का दूर करना

लक्ष्य शब्दो ने दिया यहाँ।।

कलम देवी की साथ हमारे

हमे विस्वाश हैं देवी पर यहाँ

दैवी देख रही धरा यहाँ

कृपा करेगी वही देवी

हम सत्य के साथ है यहाँ।।

अभ्यास करने लगे हैं हम

वर्तमान आंखे यहाँ

जो समझ आए करे निवारण

हम अभिव्यति देगे

लिखित यहाँ।।

शब्द जाग्रत हो रहे यहाँ।।

जीवंत कहानी जाग रही

आज

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